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दिल में आग है

Posted On: 12 May, 2011 में

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दुनिया की दुनियादारी से किसको विराग है
लोभी पतिंगों के लिए दोषी चिराग है
बारूद के एक ढेर पर बैठी है ये दुनिया
बारूद से ज्यादा हमारे दिल में आग है

Dil men aag

Dil men aag

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Mohinder Kumar के द्वारा
April 24, 2012

श्रीकान्त जी, सीने में आग होना तो अच्छा है बस उसे किसी अच्छी बस्तु को ढालने में लगाने की जरूरत है बजाये इसके कि ये खुद अपने जिस्म को ही जलाने लगे.

sumandubey के द्वारा
September 17, 2011

श्री कान्त जी नमस्कार्। गागर में सागर की तरह है।

shivnathkumar के द्वारा
May 26, 2011

बहुत सही , और कम शब्दों में काफी कुछ कह दिया आपकी इस रचना ने बधाई ………….!!

    Shrikant Singh के द्वारा
    May 27, 2011

    शिवनाथ ठाकुर जी, आपकी प्रतिक्रिया स्‍वागतपूर्ण है। उसके लिए धन्‍यवाद।

jai... के द्वारा
May 16, 2011

वाह …..

    Shrikant Singh के द्वारा
    May 17, 2011

    धन्‍यवाद———-

abodhbaalak के द्वारा
May 12, 2011

Problem ye hai sir ji, ki ye aag kabhi to bahut tez ho jaati hai aur kabhi …………. barf se bhi thandi…… kam shabdo me ……….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Shrikant Singh के द्वारा
    May 17, 2011

    अबोध बालक जी, आपकी चिंता जायज है। अगर आग है, तो वह ठंडी हो ही नहीं सकती। हां, उस पर राख की परत जरूर आ सकती है। इसी राख को हटाते रहने का नाम है जागरूकता। धन्‍यवाद।


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